देश के जाने-माने शिक्षाविद् और प्रेरणादायक व्यक्तित्व प्रोफेसर राकेश कुमार उपाध्याय आज “Most Dynamic/Versatile Professor of Nation” के रूप में अपनी अलग पहचान बना चुके हैं। शिक्षा, फिटनेस, कला और अनुशासन को साथ लेकर चलने वाले राकेश कुमार उपाध्याय युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गए हैं।
उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले में 1 मार्च 1990 को जन्मे राकेश कुमार उपाध्याय की प्रारंभिक शिक्षा सरस्वती शिशु मंदिर, गोरखपुर से हुई। बचपन से ही उन्हें पढ़ाई के साथ-साथ एक्सरसाइज, ढोलक वादन और निशानेबाजी में विशेष रुचि रही। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने अपने जुनून और मेहनत के दम पर राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई।
साल 2007 में उन्होंने Northern India Engineering College, लखनऊ से बी.टेक (Electrical & Electronics Engineering) में प्रवेश लिया और वर्ष 2011 में 73.7 प्रतिशत अंकों के साथ डिग्री हासिल की। इसके बाद बिना किसी कोचिंग के GATE परीक्षा में 98 परसेंटाइल और ऑल इंडिया रैंक 2616 प्राप्त कर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया। इसी उपलब्धि के आधार पर उनका चयन NIT पटना में एम.टेक (Control System) के लिए हुआ, जहां से उन्होंने 2014 में डिग्री प्राप्त की।
एम.टेक के बाद उन्होंने गोरखपुर के विभिन्न सरकारी एवं निजी इंजीनियरिंग संस्थानों में लगभग 7 से 8 वर्षों तक अध्यापन कार्य किया। MMMUT जैसी प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटी में भी उन्होंने अपनी सेवाएं दीं। शिक्षण के साथ-साथ उन्होंने फिटनेस और कलात्मक गतिविधियों में भी उत्कृष्टता हासिल की। खास बात यह है कि उन्होंने बिना किसी पेशेवर ट्रेनिंग और जिम के खुद को फिटनेस के क्षेत्र में मजबूत बनाया।
प्रोफेसर राकेश कुमार उपाध्याय को देश और विदेश से कई सम्मान और पुरस्कार प्राप्त हो चुके हैं। उन्होंने कई विश्व रिकॉर्ड भी अपने नाम किए हैं। वर्तमान में वे NIT जालंधर से Visvesvaraya PhD Scheme Phase-2 के अंतर्गत पीएचडी कर रहे हैं।
राकेश कुमार उपाध्याय का मानना है कि सफलता केवल बड़ी सुविधाओं से नहीं, बल्कि निरंतर मेहनत, अनुशासन और जुनून से हासिल होती है। विदेशों से आकर्षक जॉब ऑफर मिलने के बावजूद उन्होंने भारत में रहकर शिक्षा और समाज सेवा को प्राथमिकता दी।
आज उनकी कहानी लाखों युवाओं को यह संदेश देती है कि अगर लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत सच्ची हो, तो कोई भी व्यक्ति सीमित साधनों में भी असाधारण सफलता हासिल कर सकता है।